महानगरपालिका के भ्रष्ट अधिकारियों की दादागिरी, भाग रहे है अपनी जिम्मेदारियों से


महानगरपालिका अधिकारीयों की दादागिरी दिन भ दिन बढ़ती ही जा रही है। जहाँ सरकार स्वच्छ भारत अभियान चलाने का प्रयास कर रही है वहाँ कुछ ऐसे भ्रष्ट अधिकारी है जो कुछ पैसों के लिए खुदको दिए गई जिम्मेदारी का ठीक से पालन नहीं कर रहे है। ऐसेही एक घटना गोरेगाव पूर्व में दिखाई दी।
गोरेगाव पूर्व में वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के निकट सर्व्हिस रोड पर पेशाब करना और गन्दगी करना सख्त मना है ऐसे सूचना फलक कही नहीं लगाए गए है। जो की बेहद जरुरी है। और महानगरपालिका की अहम जिम्मेदारी भी है। इसी जगह पर नजदीक कोई भी शौचायल न होने के कारण यहाँ पर गुजर रहे लोग पेशाब करते है। इस वजह से यहाँ पर बहोत गन्दगी हो रही है। इसीका फायदा यहाँ पर घूम रहे गुंडे लेते है जो की खुदको क्लीन-अप के अधिकारी बताते है। इनके पास कोई भी आयडी प्रूफ नहीं होता है। यह गुंडे लोगों के बटवे में हाथ डालते है और उनसे पैसे छीनने की कोशिश करते है। और कहते है की अगर पैसा नहीं दिया तो आपको पोलिस स्टेशन लेके जायेंगे। लोग डर के मारे पैसे दे देते है। कभी ५०० की डिमांड की जाती है तो कभी २००० की भी डिमांड की जाती है। करीब ७ से ८ महीनो से यहाँ पर ये सिलसिला शुरू है। इस विषय की शिकायत यहाँ के कुछ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमान उत्कर्ष बोरले और श्रीमान रॉयन लिओ ने ५ से ६ बार पि/दक्षिण महानगरपालिका में की थी। पर कोई भी एक्शन नहीं लिया गया। इसलिए महानगरपालिका के सहायक अभियंता श्री अजय पाटने से मुलाकात के पश्चात उन्होंने कहा की आपकी कोईभी शिकायत मुझे नहीं मिली है। ये सब काम श्रीमान माधव गायकवाड देखते है। जो की उन्हीके बगल में बैठे थे। गायकवाड़ जी ने श्रीमान उत्कर्ष और रॉयन लिओ से गुस्से से कहा की ऐसी शिकायते इसके बाद मेरे पास नहीं आणि चाहिए। हमें कुछ काम धंधा है की नहीं। इससे ये तो स्पष्ट होता है की माधव गायकवाडको दी गई जिम्मेदारी से वो भाग रहे है। ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पे कड़ी से कड़ी करवाई होनी चाहिए ऐसी मांग यहाँ के समाजसेवक श्रीमान उत्कर्ष और श्रीमान रॉयन जी कर रहे है। दंड वसूल करना कोई गलत बात नहीं है। पर अगर यहाँ पर सुचना फलक लगाया जाए जोकी बेहद साधारण कार्य है उससे कई समस्याओं का सरलतासे समाधान हो सकता है। जिसकी वजह से किसीको भी कोईभी प्रकारका दंड देने की जरुरत नहीं पड़ सकती है।